खुद को ऐसे मैं छला करता हूँ
अपने साथ बड़ी दगा करता हूँ
मिलती नहीं मन्जिल जिन रास्तों से
उन्हीं रास्तों पर चला करता हूँ
ख़बर कोई मेरी लाता नहीं है
चलो अपना में कहीं पता करता हूँ
मेरे जख़्म जो कभी नहीं भरते
उन्हीं जख़्मों की मैं दवा करता हूँ
अपने ही करता हूँ मन की लेकिन
सबके दिलों की मैं सुना करता हूँ

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