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EK GAZAL

Written By jay on Friday, 30 March 2018 | March 30, 2018

खुद  को  ऐसे  मैं  छला करता हूँ 
अपने  साथ  बड़ी  दगा करता हूँ 

मिलती नहीं मन्जिल जिन रास्तों से 
उन्हीं   रास्तों  पर  चला करता हूँ 

ख़बर   कोई   मेरी  लाता  नहीं  है 
चलो अपना में कहीं पता करता हूँ 

मेरे  जख़्म  जो  कभी  नहीं भरते 
उन्हीं जख़्मों की मैं  दवा करता हूँ 

अपने ही करता हूँ मन की लेकिन 
सबके दिलों की मैं  सुना करता हूँ 

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